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Thursday, 12 February 2015

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है ।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है ।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है ।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में ।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।

असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो ।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम ।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।


Sunday, 8 February 2015

Inspiring....

जे अशक्य वाटतय
ते स्वप्न मला पहाचय...!
ज्या शञुचा कोणी पराभव करु शकत नाही
त्याला मला हरवाचय...!

कोणालाही सहन होत नाही अस दुःख मला सहन कराचय...!
ज्या ठिकाणी धाडसी माणस जाण्यास धाडस करत नाही
त्या ठिकाणी मला जाऊन धावाचय...!

ज्या वेळी माझे बाऊ थकलेत
पाय थकलेत, हात थकलेत,
शरीर थकलय, त्या वेळेस,
समोर मला " एव्हरेस्ट " दिसतय त्या वेळी मला माझे
एक एक पाऊल त्या "एव्हरेस्ट" च्या दिशेने टाकाचय...!
तो " स्टार " मला गाठाचाय. मला "सत्यासाठी" झगडाचय सर्घष कराचाय..
कुठलाही प्रश्न त्यासाठी विचरायचा नाही
थांबा घ्यायचा नाही...!

माझी नर्कात जायची सुद्धा तयारी आहे पण
त्याला कारण "स्वर्गीय"
असल पाहिजे...!

Tuesday, 20 January 2015

वन्दे मातरम्

सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्यशामलां मातरम् । 
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं 
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं 
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं
सुखदां वरदां मातरम् ।। १ ।। वन्दे मातरम् ।

कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले

कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले, 
अबला केन मा एत बले ।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं 
रिपुदलवारिणीं मातरम् ।। २ ।। वन्दे मातरम् ।

तुमि विद्या, तुमि धर्म 
तुमि हृदि, तुमि मर्म
त्वं हि प्राणा: शरीरे 
बाहुते तुमि मा शक्ति, 
हृदये तुमि मा भक्ति, 
तोमारई प्रतिमा गडि 
मन्दिरे-मन्दिरे मातरम् ।। ३ ।। वन्दे मातरम् ।

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी 
कमला कमलदलविहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम् 
नमामि कमलां अमलां अतुलां 
सुजलां सुफलां मातरम् ।। ४ ।। वन्दे मातरम् ।

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां 

धरणीं भरणीं मातरम् ।। ५ ।। वन्दे मातरम् ।।